bhajanmarg#92 – “क्या भगवान ने अन्याय होने दिया? जान लो सच्चाई!”
bhajanmarg#92 :- Premanand ji maharaj :- दो मित्र थे, एक सयाने हुए तो शराब पीने लगे और गंदे आचरण करने लगे। पैसे आगमन, युवा खेलना, शराब पीना, ऐसे एक था रोज़ गंगा नहाने जाना, भजन करना। बहुत दिनों के बाद दोनों मित्र मिले। दूर से देखाओ गंगा नहाने वाला आ रहा है तो जो गंगा नहा के आ रहा तो एक दम आह नीचे देखा तो खजूर का काटा घुस गया, उसके पैर और उसके ठोकर लगी जो पाप कर्म करता था देख थैली मिली है सर्फियों की उसने कहा रोज़ गंगा नहाता राम राम रटता क्या हुआ देख खजूर का काटा मैं मनमानी आचरण करता हूँ। देखिये थैली मिली। उसको लगा यार कि हम इतना संयम नियम से चल रहे हैं। हमें खजूर का काटा इतना बड़ा होता है, इसलिए आज से मैं गंधा नहीं ना होगा। भगवान का भजन नहीं करूँगा तो जब किसी को संशय हो जाता है तो भगवान धर्मात्मा पुरुष का संशय निवृत्त करने के लिए कोई ना कोई रूप धारण करते हैं। तो भगवान एक संत के रूप में आए। उन्होंने कहा बेटा तुम्हारी काँटा लग गया क्या लाओ, मैं निकाल दूं, तुम भगवान का भजन करते हो इसलिए तुम धन्य हो तो उनका अब यह सब बातें हमको मत बताओ कि धन्य हो धन्य वह है तो उनका बेटा तुम्हें उसे पूर्वजन्म की बातें याद नहीं तुम्हारा पूर्वजन्म में इस समय तुम्हें सूली की सजा मिलनी थी। खजूर के काटे से इसलिए निकल गई। कि तुम गंगा नहाते हो, नाम जप करते हो और इसे चक्रवर्ती सम्राट होना। था, और ये अपने पाप कर्म करके, बस ये आखिरी थैली है, ये जहां भोग लेगा इसे दुर्गति प्राप्त होगी और तुम्हारा ये काटा आख़िरी और ये जहाँ हटा इसकी पीड़ा हटी तो तुम परम धाम को परम लाभ को प्राप्त हो जाओगे तो कभी कभी वर्तमान की घटनाओं में हम लोग भगवान पर असद्धा कर लेते हैं| nextpage
bhajanmarg#93 – “जब भगवान हर जगह हैं तो तीर्थ यात्रा क्यों करें?”
bhajanmarg#93 :- भक्त :- भगवान सभी जगह है कनकन में है, तो धार्मिक स्थलों पर जाना चाहिए या नहीं महाराज जी?
Premanand ji maharaj :- मेहंदी में लालिमा होती है, होती है ना, पर मेहंदी के पूरे पेड़ को चीर डालो। कहीं लालिमा दिखा दो नहीं ना उसकी एक प्रक्रिया है ये जो तीर्थ बने हैं। ये अध्यात्मिक पावर है। जैसे गंगा जी नहा के आप देखो कैसा लगता है एकदम? लेकिन नियमानुसार अब गाय कुल्ला कर रहे हो, थूक रहे हो और मल रहे हो, साबुन लगा रहे हो, कोई नहीं होगा गए, माथा में जल रखा और गए 5711 डुबकी लगाई, एकदम बाहर हो गए देखो एकदम आनंद आएगा। वृंदावन आय परिक्रमा लगाओ, बिहारी जीके दर्शन करो, किसी का दिया हुआ कुछ खाओ मत रजरानी लगाओ, नाम जब करो जब जाओगे तो एक अच्छा अनुभव है। ये परम पवित्र स्थान बनाए गए हैं कि हमको अध्यात्म का सहयोग मिले। हमारे जो गलतियाँ हो गई, पाप हो गए। वो नष्ट हो जाए तो साधना का प्रारंभ करने के लिए हमें जो पवित्रता चाहिए वो गंगा है, काशी है जो बड़े बड़े तीर्थ है। इनमे इसीलिए जाया जाता है कि हम गृहस्थ हैं हमसे कोई ना कोई पाप बन जाते हैं तो इन तीर्थों में जाने से हमारे पाप नष्ट होते हैं, हमारे पुण्य बनते हैं, हमारा ह्रदय पवित्र होता अवश्य जाना चाहिए। पर जीस पर जीस पद्धति से रहना। उसी पद्धति से हर तीर्थ में 1 दिन उपवास करना चाहिए। अगर 3 दिन वास करें तो 1 दिन उपवास करना चाहिए। दूसरे दिन फलाहार करना चाहिए। तीसरे दिन अन्ना हार करना चाहिए। 1 दिन तो पूरे पूरा ऐसे जल पर रहना चाहिए कष्ट सहना चाहिए ऐसे तीर्थों में ठीक है। nextpage
bhajanmarg#94 – “देख नहीं सकता… क्या भगवान मुझे भी दर्शन देंगे?”
bhajanmarg#94 :- भक्त :- महाराज जी आप आँखों से देख नहीं पाते तो कह रहे हैं कि मुझे भगवान के दर्शन कैसे होंगे, मुझे तो दिखाई नहीं देता।
Premanand ji maharaj :- इन आँखों की जरूरत भी नहीं है। भगवान इन आँखों से दिखाई भी नहीं देते। इन आँखों से केवल माया देखी जा सकती है। जीस दिन भगवान तुम्हें दर्शन देना चाहेंगे, उस दिन अंदर की दृष्टि खोल लेंगे। भगवान का साक्षात्कार हो जाएगा। हम भला देख पाते। क्या नेत्रवान होते हुए भी अंधे हैं? केवल माया का रचा हुआ शरीर माया का रचा हुआ संसार देख पाते हैं नाम जप करो भगवान तुम्हारे भाव में आकर तुम्हें दर्शन दे देंगे। अभी आप जो सोचते हैं वह झांकी अंदर देख पाते हैं कि नहीं?
भक्त :- हमारे जैसे कोई मन की चीज़ हो तो वो
Premanand ji maharaj :- ये जैसे हम आपके सामने बैठे हैं। आप भावना करो की सुना है ना की वो कैसे हैं तो? आप कल्पना कर सकते। हो की वो कैसे हैं? तो आपके मानव पटन पर। वो झाँकी आ जाएगी जैसी आपने कल्पना की हाँ? आ जाएगी ना? हाँ तो इसका मतलब है की नेत्र है। nextpage


